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छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
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दुर्ग। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला ग्राम कोड़िया, जिला दुर्ग में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रोजेक्ट जागृति के तहत एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें भाषा विशेषज्ञ डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने कक्षा 8वीं से 12वीं तक के 300 छात्र-छात्राओं को जीवन में भाषा और संस्कारों का महत्व समझाया।

भाषा से बनता-बिगड़ता है व्यक्तित्व
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने सभी गुरुजनों का शाल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ से सम्मान कर आशीर्वाद लिया।
भाषा दीदी के रूप में डॉ. सोनाली ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि “मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व खराब हो जाता है यदि उसकी भाषा अच्छी न हो।” उन्होंने बच्चों को गालियों से दूर रहने की समझाइश देते हुए कहा, “जिस मां से हम इतना प्यार करते हैं, जिन्होंने अपने सारे सपने अपने बच्चों के लिए त्याग दिए, उनका नाम गालियों में लाना उचित कैसे हो सकता है?”

उन्होंने कहा कि इस उम्र में बच्चे बहुत जल्दी सीखते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि क्या सीखा जा रहा है। “क्लास में टॉप करने वाले बच्चों से उनकी लगन और परिश्रम सीखना चाहिए, न कि दोस्तों से गलत भाषा।”
कार्यशाला में डॉ. सोनाली ने गीतों और कहानियों के माध्यम से बच्चों को मोटिवेट भी किया। उल्लेखनीय है कि पिछले ढाई वर्षों में डॉ. सोनाली इस अभियान के तहत अब तक 10,000 से अधिक बच्चों से मिलकर कार्यशालाएं ले चुकी हैं।
प्राचार्य ने कहा – व्यक्तित्व विकास में सहायक
शाला की प्राचार्य नीलमणि उज्जवने ने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में बेहद सहयोगी साबित होगा। शिक्षकों प्रीतम कुमार देवांगन, शीला चंद्रा, धनेश्वरी सिन्हा, चित्रांशीपणी बिसेन, प्रीति सलाम, हर्षा महलवार ने भी इसे जीवन जीने की कला सिखाने वाला कार्यक्रम बताया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. सरोज साहू ने किया और संचालन हेड बॉय दीपेश कुमार ने किया।
