द्वादश ज्योतिर्लिंग महारुद्र अभिषेक से शिवभक्ति में सराबोर हुआ दुर्ग


सतरूपा शीतला मंदिर में माँ शक्ति स्वरूपा समिति का भव्य आयोजन, विधायक-महापौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल

दुर्ग। सावन और नागपंचमी के पावन अवसर पर दुर्ग नगरी सोमवार को शिवभक्ति में डूब गई। माँ शक्ति स्वरूपा समिति, दुर्ग द्वारा सतरूपा शीतला मंदिर परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंग महारुद्र अभिषेक का भव्य आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्वरूपों का एक साथ विधि-विधानपूर्वक अभिषेक इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा।

मंदिर परिसर सुबह से ही भक्तों से भरा रहा। वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जल, दुग्ध और पूजन सामग्री से ज्योतिर्लिंगों का अभिषेक कर मनोकामनाएं मांगी।

भिलाई के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत शर्मा और उनकी टीम ने विद्वान आचार्यों के साथ शास्त्रोक्त विधि से महारुद्र अभिषेक सम्पन्न कराया। मंत्रों की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में विधायक ललित चंद्राकर, दुर्ग शहर की महापौर श्रीमती अलका बागमार, दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कौशिक, कांग्रेस के पूर्व विधायक अरुण वोरा, वरिष्ठ समाजसेवी कैलाश बरमेचा एवं श्रीमती मंजू बरमेचा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर पूजा में सहभागिता की और समिति द्वारा किए गए आयोजन की सराहना की।

समिति ने जताया आभार
माँ शक्ति स्वरूपा समिति की संयोजिका डॉ. भावना दिवाकर ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा और श्रद्धालुओं की आस्था से यह आयोजन भव्य बन सका। उन्होंने कहा कि सावन जैसे पवित्र अवसरों पर ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ते हैं। समिति का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं, बल्कि समाज में एकता और संस्कार की भावना को मजबूत करना भी है।

आयोजन की सफलता में समिति की सदस्यों कुलविंदर कौर, गीता वर्मा, रिंकी साहू, वारुणी डेहरे, बसंती साहू, रंजीता, मीनू मिंज, पार्वती पंडित, रजनी मिश्रा, अर्चना साहू, विभा मिश्रा, श्वेता साहू, श्रद्धा साहू, शीतल तिवारी, प्रीति, साधना शर्मा, खुशबू सिंह सहित सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

समिति ने व्यवस्थाओं, अतिथि सत्कार और पूजा की तैयारियों में सराहनीय भूमिका निभाई।
अंत में पूरा मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंजता रहा। यह आयोजन दुर्ग के धार्मिक-सामाजिक जीवन में एक स्मरणीय अध्याय बन गया ।