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भिलाई/ विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की पूर्व संध्या पर सियान सदन, हाउसिंग बोर्ड में “वरिष्ठजन कल्याण महासंघ” द्वारा गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। समारोह में वरिष्ठजनों के सम्मान के साथ साहित्य, संगीत, योग और आत्मरक्षा जैसे विविध कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में वरिष्ठजनों की महत्ता को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। मंच पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा, आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा, डॉ. डी.पी. देशमुख, डॉ. नीलकंठ देवांगन, हेमलाल साहू ‘निर्मोही’, महासंघ अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता और कांतिलाल विश्वकर्मा उपस्थित रहे।
“वरिष्ठजन समाज की अमूल्य धरोहर”
आयोजित संगोष्ठी का विषय “वरिष्ठजन : अनुभव की पूंजी और समाज की अमूल्य धरोहर” रहा। महासंघ अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने कहा कि “वरिष्ठजन बोझ नहीं, समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, ज्ञान और संस्कार नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। समाज को चाहिए कि वह वरिष्ठजनों की प्रतिभा और अनुभव का सकारात्मक उपयोग करे। वरिष्ठजन कल, आज और आने वाली पीढ़ी के बीच सेतु का कार्य करते हैं।”

5 साहित्यकार सम्मानित, दो पुस्तकों का विमोचन
हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. परदेशी राम वर्मा, आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा, डॉ. डी.पी. देशमुख, डॉ. नीलकंठ देवांगन और हेमलाल साहू ‘निर्मोही’ को “वरिष्ठजन साहित्य शिरोमणि सम्मान” से सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र और पेन भेंट किए गए।
तीन बार ऑपरेशन के बावजूद सक्रिय रहने वाले कांतिलाल विश्वकर्मा को “वरिष्ठजन विशिष्ट गौरव सम्मान” दिया गया। उन्होंने 75 वर्ष की आयु में इग्नू से इंडस्ट्रियल सेफ्टी में एमएससी की परीक्षा दी है।
इसके अलावा 80 वर्ष से अधिक आयु के 18 वरिष्ठ नागरिकों का अंगवस्त्र, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया। समारोह में डॉ. नीलकंठ देवांगन की दो नई पुस्तकों “अंतस के पीरा” और “छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल” का विमोचन भी हुआ।

योग, संगीत और मार्शल आर्ट की प्रस्तुति
गायक जोसफ के नेतृत्व में वरिष्ठजनों ने गीत-संगीत की प्रस्तुति दी। अभिषेक मार्शल आर्ट एवं स्पोर्ट्स एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने आत्मरक्षा पर आधारित प्रदर्शन कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 70 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठ महिलाओं द्वारा योग और पिरामिड फॉर्मेशन रहा। उनके आत्मविश्वास और समन्वय ने यह संदेश दिया कि उम्र सक्रियता में बाधा नहीं है।
संगोष्ठी में साहित्यकारों ने वरिष्ठजनों को समाज का मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम के अंत में नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया गया।
समारोह का संचालन सुमन देवांगन और छाया विश्वकर्मा ने किया। आभार कांतिलाल विश्वकर्मा ने व्यक्त किया।