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छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
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00 पत्रकार वार्ता कर किसान संघर्ष समिति महिला प्रकोष्ठ ने फिर एक बार श्री सीमेंट फैक्ट्री का विरोध दर्ज कराया,
00 चाहे कुछ भी हो जाए,हम पिछे नही हटेंगे, शासन प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी,
00 महिलाएं करेंगी आंदोलन की अगुवाई,इस बार आर य पार की लडाई,
(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)खैरागढ़ : हम पिछे नही हटेंगे किसान संघर्ष समिति का ऐलान,चाहे कुछ भी हो जाए।।दनिया-अतरिया, हनईबन और उदयपुर क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री एवं चूना पत्थर खदान परियोजना को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है।।पूर्व में किसानों के व्यापक विरोध के बाद टली जनसुनवाई को लेकर दोबारा सुगबुगाहट के बीच किसान अधिकार संघर्ष समिति महिला प्रकोष्ठ ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता कर प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों की इच्छा के विरुद्ध जनसुनवाई कराने का प्रयास हुआ तो व्यापक और उग्र लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।। पत्रकार वार्ता से पहले महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरी परियोजना को निरस्त करने की मांग भी की।।

गांवों में कंपनी की घुसपैठी के बाद फिर तेज हुआ विरोध
किसान अधिकार संघर्ष समिति की अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि समिति लंबे समय से श्री सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में संघर्षरत है।।उन्होंने बताया कि गुरुवार को सीमेंट फैक्ट्री से जुड़े लोग क्षेत्र के कुछ ग्रामों में पहुंचे थे।। वहां ग्रामीणों से सीमेंट फैक्ट्री का विरोध करने की वजह पूछने के साथ परियोजना के खुलने से होने वाले संभावित फायदे के बारे में जानकारी दी जा रही थी।। लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि इसी वजह से समिति ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर और पत्रकार वार्ता के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र के किसान और ग्रामीण यह परियोजना नहीं चाहते।। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन, पानी, पर्यावरण और आजीविका से जुड़े फैसले उनकी इच्छा के विपरीत नहीं लिए जा सकते।। यदि जनसुनवाई थोपने अथवा परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया तो किसान संगठन पूरी ताकत के साथ इसका विरोध करेगा।।

6 दिसंबर 2025 के प्रदर्शन से भी बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
लुकेश्वरी जंघेल ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि पूर्व में 6 दिसंबर 2025 को जनसुनवाई के विरोध में हुए उग्र प्रदर्शन से भी अधिक व्यापक आंदोलन इस बार किया जाएगा।।उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन की अगुवाई क्षेत्र की महिलाएं करेंगी।।आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।।
किसान संघर्ष समिति ने प्रशासन से टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय किसानों के साथ खुली और पारदर्शी बातचीत करने की मांग की
संगठन का कहना है कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए और किसानों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।।
जल, जंगल, जमीन और आजीविका का सवाल
किसान अधिकार संघर्ष समिति ने कहा कि क्षेत्र के किसान जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और अपनी आजीविका के सवाल पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।। समिति का कहना है कि खनन, ब्लास्टिंग, क्रशिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से धूल, शोर और कंपन बढ़ने की आशंका है।। इसके अलावा भूजल और स्थानीय जलस्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं।।
समिति ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन, जलस्रोत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी परियोजना का समर्थन नहीं किया जा सकता।।
राजनीतिक दलों से भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
समिति ने जिले के सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से भी अपना रुख सार्वजनिक करने की मांग की है।। संगठन ने कहा कि चुनाव के समय किसानों के बीच जाकर समर्थन मांगने वाले नेताओं को अब किसानों की जमीन और आजीविका के सवाल पर स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे किसानों के साथ हैं या उद्योग के पक्ष में।।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल परियोजना को आगे बढ़ाने अथवा जनसुनवाई कराने के प्रयास का समर्थन करता है तो उसका लोकतांत्रिक और राजनीतिक स्तर पर जवाब दिया जाएगा।।

जमीन खरीद के दबाव और कथित बिचौलियों की जांच की मांग
किसान संगठन ने किसानों की जमीन खरीदने के लिए कथित दबाव या प्रलोभन दिए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।। समिति ने कहा कि किसानों की जमीन को लेकर किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।। साथ ही जमीन खरीद में कथित बिचौलियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।।
विगत दिनों प्रशासन और कंपनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी सवाल
समिति ने पिछली बार लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।। समिति का आरोप है,कि अधिकारियों ने उद्योग से जुड़े लोगों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।। संगठन ने प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और कंपनी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।।
परियोजना निरस्त करने की मांग पर अडिग
किसान अधिकार संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग केवल एक है,प्रस्तावित श्री सीमेंट चूना पत्थर खदान एवं सीमेंट फैक्ट्री परियोजना को निरस्त किया जाए और किसानों की इच्छा के विरुद्ध जनसुनवाई कराने का प्रयास न किया जाए।।
समिति ने कहा कि किसान अपनी जमीन और भविष्य के सवाल पर चुप नहीं बैठेंगे
यदि जनसुनवाई थोपने या परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई तो शांतिपूर्ण, संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस बार क्षेत्र की महिलाएं आंदोलन की अगुवाई करेंगी।।
