छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED ने बढ़ाया जांच का दायरा, सचिवालय के पूर्व अफसरों से पूछताछ


राज्य ACB-EOW की जांच की प्रगति पर भी उठे सवाल, सियासी गलियारों में हलचल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में जांच का दायरा व्यापक करते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े रहे कई वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों, मुख्य सचिव स्तर के पूर्व अधिकारियों और शीर्ष नौकरशाहों से घंटों पूछताछ की।

ED ने आधिकारिक तौर पर पूछताछ के निष्कर्ष या किसी संभावित कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच की बढ़ती रफ्तार ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के लिए पहुंचे कुछ वरिष्ठ अधिकारी सरकारी वाहनों के बजाय निजी वाहनों का इस्तेमाल करते देखे गए। हालांकि इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के दायरे में क्या-क्या
जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार इस मामले में आबकारी नीति में बदलाव, FL-10 और FL-10A लाइसेंस व्यवस्था में कथित फेरबदल, नकली लेबलिंग और शराब सिंडिकेट को कथित लाभ पहुंचाने जैसे पहलू शामिल हैं। आरोप है कि इन अनियमितताओं से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
ED पहले भी इस मामले में कथित अवैध लेनदेन और संपत्तियों पर कार्रवाई कर चुकी है। अब एजेंसी दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अलग-अलग बयानों का मिलान कर रही है ताकि जांच को अगले चरण तक ले जाया जा सके।

राज्य एजेंसियों की जांच कहां?
इसी मामले की जांच राज्य स्तर पर ACB और EOW के पास भी है। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि उस जांच की प्रगति क्या है? कई साल बीत जाने के बाद भी राज्य एजेंसियों की जांच की रफ्तार को लेकर विपक्ष और आम जनता सवाल उठा रही है।
सवाल है कि ACB-EOW ने अब तक कितने लोगों से पूछताछ की, कौन-कौन से निष्कर्ष सामने आए और जांच किस चरण में है। एक तरफ ED नए दस्तावेजों के आधार पर दायरा बढ़ा रही है, दूसरी तरफ राज्य एजेंसियों की धीमी प्रगति को लेकर चर्चा है।

सियासी पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के समय कथित शराब घोटाला सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा था। भाजपा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और निष्पक्ष कार्रवाई का वादा किया था। अब जब केंद्रीय एजेंसी की जांच आगे बढ़ रही है, तो लोगों की निगाहें इस पर हैं कि प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पूछताछ होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होंगे।

जनता पूछ रही – परिणाम कब?
इस पूरे घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। जनता सिर्फ जांच शुरू होने की खबर नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्ष और परिणाम चाहती है।

फिलहाल ED की जांच पर सबकी नजर है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है। अब देखना होगा कि जांच की यह रफ्तार सच तक पहुंचती है या सुर्खियों तक ही सीमित रह जाती है।