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छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
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रायपुर: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ की अत्याधुनिक डायल 112 आपातकालीन सेवा और फॉरेंसिक मोबाइल वैन के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डायल 112 सेवा अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में लागू हो गई है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह उपस्थित रहे।
493 वाहन बेड़े में शामिल
राज्यव्यापी विस्तार के तहत 400 नए आपातकालीन वाहन, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 राजमार्ग गश्ती वाहन रवाना किए गए। 2018 से संचालित डायल 112 सेवा पहले 16 जिलों तक सीमित थी।
नई सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्थान पहचान तकनीक जोड़ी गई है। इससे संकट में फंसे व्यक्ति की सटीक लोकेशन मिल सकेगी। सिविल लाइंस स्थित प्राथमिक नियंत्रण केंद्र के अलावा नया रायपुर पुलिस मुख्यालय में बैकअप के लिए दूसरा नियंत्रण केंद्र भी सक्रिय किया गया है।

कई माध्यमों से मिलेगी मदद
अब नागरिक फोन कॉल के अलावा 112 इंडिया ऐप, संकट संकेत सेवा, एसएमएस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद प्रणाली, ईमेल, वेब अनुरोध और सोशल मीडिया से भी सहायता ले सकेंगे। महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और विशेष निगरानी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। पुलिस, एम्बुलेंस, अग्निशमन और महिला हेल्पलाइन एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी।
32 फॉरेंसिक वैन रवाना
नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने के लिए सभी 33 जिलों में आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल प्रयोगशालाएं गठित की गई हैं। रविवार को 32 फॉरेंसिक मोबाइल वैन मैदान में उतारी गईं।
इन वैन में रक्त नमूना परीक्षण किट, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण उपकरण, सीसीटीवी दृश्य सामग्री निकालने की प्रणाली, जीपीएस, लैपटॉप, जनरेटर, रात्रि दृष्टि कैमरे और अन्य उपकरण लगे हैं।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176 के तहत सात वर्ष या अधिक सजा वाले गंभीर अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक दल की उपस्थिति और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य है। इन वैन से फॉरेंसिक विशेषज्ञ मौके पर ही साक्ष्यों को सुरक्षित कर प्राथमिक जांच कर सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार यह पहल कानून व्यवस्था के आधुनिकीकरण और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।