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बेमेतरा। सिख धर्म के सर्वोच्च एवं शाश्वत गुरु, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के 422 वें प्रथम प्रकाश गुरुपर्व को 12 सितंबर 2026 को भारत सहित पूरे विश्व में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
यह जानकारी बेमेतरा के वरिष्ठ सिख समाज सेवक एवं जिला अध्यक्ष हरदीप सिंघ राजा छाबड़ा ने दी। उन्होंने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए सत्य, प्रेम, समानता, सेवा और भाईचारे का मार्गदर्शन देने वाले शाश्वत गुरु हैं। दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु गद्दी प्रदान कर सिख पंथ को शब्द गुरु का मार्ग दिखाया था, तभी कहा गया है – आज्ञा भई अकाल की तभै चलायो पंथ, सभ सिक्खन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।
1604 में हुआ था प्रथम प्रकाश
इतिहास के अनुसार पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने प्रथम चार गुरु साहिबानों की वाणी, अपनी पावन बाणी तथा विभिन्न संत-भगतों की रचनाओं को एकत्रित कर आदि ग्रंथ का संपादन करवाया था। भाई गुरदास जी ने लेखन सेवा निभाई। सन 1604 ईस्वी में श्री गुरु अर्जन देव जी ने इस पावन ग्रंथ का प्रथम प्रकाश श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में करवाया और बाबा बुद्धा जी को प्रथम ग्रंथी की सेवा सौंपी।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की विशेषता है कि इसमें एक समुदाय नहीं, बल्कि समूची मानवता की भलाई और जात-पात, ऊंच-नीच से ऊपर उठकर एक परमात्मा की उपासना का संदेश है।
छाबड़ा ने कहा कि आज जब समाज तनाव और भेदभाव से गुजर रहा है, तब गुरु ग्रंथ साहिब की बाणी प्रेम, संयम और सद्भावना का रास्ता दिखाती है। गुरु साहिब सिखाते हैं कि मनुष्य की पहचान जाति-धर्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और सेवा से होती है।
उन्होंने संगत से अपील की कि केवल माथा टेकने तक सीमित न रहें, बल्कि गुरबाणी को जीवन में धारण करें, जरूरतमंदों की सेवा करें और नशे व सामाजिक बुराइयों से दूर रहें।