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बेमेतरा। जिले के ग्राम मरका में लगभग 24 लाख रुपये की लागत से निर्मित शासकीय प्राथमिक शाला के नए भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। भवन का अभी विभाग को हैंडओवर भी नहीं किया गया है, लेकिन दीवारों में कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) द्वारा ग्राम मरका में शासकीय प्राथमिक शाला का नवीन भवन तैयार कराया गया है। हालांकि, भवन के औपचारिक हैंडओवर से पहले ही दीवारों में दरारें नजर आने लगी हैं। दरारों की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन छोटे बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाया गया है। ऐसे में शुरुआत में ही दीवारों में दरारें दिखाई देना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

मामले को लेकर भाजपा के जिला अध्यक्ष अजय साहू ने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन का हैंडओवर तभी किया जाना चाहिए, जब जांच में निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाए। यदि जांच में गुणवत्ता संबंधी लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान विभागीय इंजीनियरों द्वारा नियमित निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच का दावा किया जाता है। इसके बावजूद हैंडओवर से पहले ही भवन में दरारें आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

फिलहाल ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने स्वतंत्र तकनीकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। विभाग की प्रतिक्रिया आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
