हमारे बारे में
छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
हमारे बारे में
छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।

दुर्ग। पुलिस लाइन सभागार में रविवार को शौर्य चक्र से सम्मानित निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख का नागरिक अभिनंदन किया गया। नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय साहस और नेतृत्व के लिए दोनों अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
एसपी ने बताया प्रेरणास्रोत
पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कहा कि शौर्य चक्र जैसा राष्ट्रीय सम्मान पाना गौरव की बात है। दोनों अधिकारियों ने विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। उनकी उपलब्धियां पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने युवा पुलिसकर्मियों से जनता की सुरक्षा और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

40 मुठभेड़ों में रहे शामिल: लक्ष्मण केवट
निरीक्षक लक्ष्मण केवट 12 अप्रैल 2007 को सूरजपुर में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए। नवंबर 2014 में निरीक्षक बने। बीजापुर, राजनांदगांव और कांकेर में सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में थाना प्रभारी पखांजूर हैं। नक्सल विरोधी अभियानों में 40 सफल मुठभेड़ों में शामिल रहे और 97 नक्सलियों के शव बरामद करने में भूमिका निभाई। उन्हें एक शौर्य चक्र, 6 पुलिस वीरता पदक, एक केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति मिल चुकी है।

58 नक्सलियों के शव बरामद: रामेश्वर देशमुख
निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख 18 जून 2007 को दंतेवाड़ा में आरक्षक बने। जुलाई 2015 में निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। बीजापुर, राजनांदगांव और कांकेर में सेवाएं दीं। वर्तमान में थाना प्रभारी भानुप्रतापपुर हैं। 25 सफल मुठभेड़ों में शामिल रहे और 58 नक्सलियों के शव बरामद करने में योगदान दिया। इन्हें एक शौर्य चक्र, 2 पुलिस वीरता पदक, एक केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति मिली है।

शौर्य चक्र का महत्व
शौर्य चक्र शांति काल का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह असाधारण साहस, वीरता और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में पराक्रम दिखाने वाले सैन्य, अर्धसैनिक, पुलिस अधिकारियों और नागरिकों को दिया जाता है।
समारोह में एएसपी शहर, एएसपी ग्रामीण, सीएसपी, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक और पुलिस परिवार के सदस्य मौजूद रहे। उपस्थितजनों ने दोनों अधिकारियों के संघर्षपूर्ण सेवाकाल के अनुभव सुने।
