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छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
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00 अनु जोड़कर आगे बड गई, जिसके बाद वह राग अनुराग बन गया : आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री,
00 दिव्य दरबार में उमड रही भक्तों की भीड़, सैकड़ों की संख्या में जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्र वासी रोज कथा का रसपान करने पहुच रहे,
00 खैरागढ़ ब्लाक के ग्राम देवरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में यह उद्गार आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री (चायवाले बाबा) ने कही,
खैरागढ़ : एक बार की सत्य घटना है मीराबाई वैराग्य होने के बाद उनका मन,हृदय,आत्मा सदैव भग्वत् भक्ती, भजन और साधु-संतो की संगत और सेवा मे ही लगा रहता था।। एक बार देर रात तक भजन चला, ब्रम्ह काल मे मीरा को भजन कीर्तन के साथ ही समाधि लग गई, तब साधु-संत मीरा को अपने अगले पडाव का पता छोड़कर और एक दिवार पर लिख गए कि मीरा थोडा राग से भजन गाया करो तो मीरा बिना विचलित हुए उस राग के आगे “अनु”जोड़कर आगे बढ गईं, जिसके बाद वह राग अब अनुराग बन गया, सार यही है कि आप कितने ही सुरताल,वाद्ययंत्र, संगतकारो के साथ भजन करते रहो,परन्तु यदि आपके हृदय मे प्रभु के प्रति अनुराग नही है तो आपके कभी कल्याण नही होने वाला है,और सदियों से हर धर्म, सम्प्रदाय, के गुरूओं ने यही किया है,कि अपने अपने शिष्यो के हृदय मे प्रभु भक्ति के प्रति अनुराग पैदा करने की कोशिश की है,फिर चाहे भजन कितना ही कर्कश आवाज मे किया जाए कोई अंतर नही पडने वाला है।।
उपरोक्त उद्गार यहा नवीन जिला खैरागढ छुईखदान गंडई जिला मुख्यालय से लगभग बारह कि मी दूर स्थित ग्राम देवरी मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पंडाल मे सैकडों श्रद्धालुओं सेवको, व सनातनियो के मध्य आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री (चाय वाले बाबा) ने कही,आपने प्रभु कृपा प्राप्ति के मार्ग को परिभाषित करते हुए बताया कि पहले भजन सिर्फ भगवान को समर्पित हुआ करता था,तब उसमे अनुराग हुआ करता था,प्रेम होता था,प्रेम मे त्याग ही त्याग होता था,पाना कुछ नही था तब जब चाहो भगवान मिला करते थे,मीराबाई, सूर, कबीर,संत ज्ञानेश्वर, तुलसी रैदास,रसखान ये सभी भक्तिकाल के उदाहरण है,आज की मांग शानदार पंडाल, माईक ,भजन की टुकड़ियां ,यूट्यूब,इंस्टाग्राम, है,सबसे महत्वपूर्ण राग है,यहां बहुतो के प्रति राग भी नही होता है ।।केवल जलनखोरी होती है, बाद मे जब कर्म का वही प्रतिफल आपके दुखो का कारण बनता है,अतः हमे जीवन का हर कार्य हर कर्म प्रभु का काम समझकर करना चाहिए, तब हृदय मे त्याग और प्रेम का जागरण होगा फिर यदि प्रभु ने चाहा तो वही अनुराग बनेगा,और जहां भगवान के प्रति अनुराग हो तो भगवान शबरी के बेर खाने भक्त को खोजते हुए वन तक आते है।।
ज्ञात हो कि आचार्य नरेन्द्र नयन जी चाय वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध है केवल चावल देखकर अपने ज्ञान से सटिक गणना बताते है प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक उनका दरबार लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग एक मुट्ठी चावल ले कर दरबार में उपस्थित हो कर अपने समस्याओं एवं परेशानीयो से निजात मिलने की उम्मीद लेकर पहुच भी रहे हैं और खास बात यह है कि चाय वाले बाबा अपने द्वारा किए गए भागवत कथा का सारा चढावा गरीब बेटियो को दान कर देते है ग्राम देवरी मे आपके श्रीमुख से कथा श्रवण करने ग्रामीण जनो के अलावा सैकडो शिष्य कथा स्थल पर आ रहे है।।