31 जुलाई तक अनिवार्य रूप से दाखिल करें गैर-ऑडिट श्रेणी का ITR


नए कॉलम की जानकारी न देने पर मिल सकता है आयकर विभाग का नोटिस: सीए मिनेश जैन

दुर्ग। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की भिलाई शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए मिनेश जैन ने सभी पात्र करदाताओं से 31 जुलाई 2026 तक गैर-ऑडिट श्रेणी का आयकर रिटर्न दाखिल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में पोर्टल पर लोड, तकनीकी समस्या और दस्तावेजों की कमी से बचने के लिए समय रहते रिटर्न जमा करना बेहतर रहेगा।

ITR में जोड़ा गया नया कॉलम, जानकारी देना जरूरी
सीए जैन ने बताया कि इस वर्ष आयकर रिटर्न फॉर्म में एक महत्वपूर्ण नया कॉलम जोड़ा गया है। इसमें उन प्राप्तियों का विवरण देना है जिन्हें आयकर अधिनियम के अनुसार आय नहीं माना जाता और जिन पर कर देय नहीं होता।

इस कॉलम में निम्न प्राप्तियों की जानकारी देनी होगी:

  • रिश्तेदारों से प्राप्त उपहार
  • 50,000 रुपये तक के करमुक्त उपहार
  • विवाह के अवसर पर प्राप्त उपहार
  • ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री से प्राप्त राशि
  • पूंजीगत प्राप्तियां अथवा अन्य गैर-करयोग्य प्राप्तियां
  • ऐसी सभी प्राप्तियां जो बैंक खाते में आईं लेकिन करयोग्य आय नहीं हैं

AIS और SFT के डाटा से होगा मिलान
सीए मिनेश जैन ने बताया कि आयकर विभाग के पास अब बैंकिंग डाटा, AIS, SFT और अन्य डिजिटल माध्यमों से वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी उपलब्ध है। विभाग बैंक खाते में आई कुल राशि का मिलान रिटर्न में घोषित आय से करता है।

यदि बैंक में आई राशि अधिक है और रिटर्न में उसका उचित विवरण नहीं दिया गया तो विभाग को अंतर संदेहास्पद लग सकता है और करदाता को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। जबकि वह राशि पूरी तरह करमुक्त भी हो सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए कॉलम का उद्देश्य अतिरिक्त कर लगाना नहीं, बल्कि बैंक खाते और रिटर्न की जानकारी में सामंजस्य स्थापित करना है। यदि गैर-करयोग्य प्राप्तियों का सही विवरण दिया जाए तो भविष्य में अनावश्यक पूछताछ और नोटिस से बचा जा सकता है।

देर से रिटर्न पर लगेगा जुर्माना
सीए जैन के अनुसार 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 1,000 से 5,000 रुपये तक विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। यदि कर देय है तो उस पर ब्याज भी लगेगा।

समय पर रिटर्न न भरने पर व्यवसाय या पूंजीगत हानि को आगे ले जाने का लाभ नहीं मिलेगा और रिटर्न में संशोधन की सुविधा भी सीमित हो जाएगी।

उन्होंने करदाताओं से अनुरोध किया कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें। बैंक खाते, AIS, TIS, फॉर्म 26AS का मिलान कर सभी करयोग्य और गैर-करयोग्य प्राप्तियों का सही विवरण दें। किसी भी संदेह की स्थिति में योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेकर ही रिटर्न दाखिल करें।