शुक्रिया विश्वरंजन,हम सबको ‘फैजयाब’ करने के लिए


वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन के फेसबुक वाल से

साल 2011 में छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। जाहिर सी बात है शासन भारतीय जनता पार्टी का था। तब पुलिस प्रमुख (डीजीपी) विश्वरंजन हुआ करते थे। उनकी पहचान एक बड़े ओहदे वाले पुलिस अफसर से हटकर साहित्यकार की ज्यादा थी।

तब उनके पुलिस मुखिया रहते समूचे छत्तीसगढ़ में साहित्य से जुड़े कई प्रमुख आयोजन हुए। भारतीय उपमहाद्वीप के मशहूर शायर फैज अहमद फैज की जन्मशताब्दी का समारोह भी विश्वरंजन के चलते संभव हो पाया था।
तब 14-15 मई 2011 को भिलाई होटल (निवास) में दो दिन के इस आयोजन में न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि पाकिस्तान से भी कई खास मेहमान आए थे। इनमें फैज की बेटी मुनीजा हाशमी और वहां की मशहूर स्कॉलर आरफा सैयदा जहरा भी शामिल हैं।

इस ऐतिहासिक आयोजन में मुझे भी शामिल होने और हिंदुस्तान-पाकिस्तान की कुछ बड़ी हस्तियों का इंटरव्यू करने का मौका मिला था। आज विश्वरंजन के गुजरने की खबर पहुंची तो उसी आयोजन की याद आ गई। जाहिर है ऐसा आयोजन करना सिर्फ विश्वरंजन के बूते की ही बात थी।

हाल के कुछ बरसों में महान शायरों फैज और इकबाल के लिखे को लेकर जैसा माहौल बना है, उसे देखते हुए यकीन नहीं होता कि 15 बरस पहले भिलाई में ऐसा आयोजन सरकारी स्तर पर हो चुका है। जहां आज उनके कलाम ‘हम देखेंगे’ पर ‘पहरा’ लगा है। वहीं तब फैज का यह कलाम उस आयोजन में खूब गाया गया था।
खैर, विश्वरंजन एक पुलिस अफसर से बढ़ कर कलम के धनी ज्यादा थे। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि..
(यहां फोटो उसी फैज जन्मशताब्दी समारोह की, जो नहीं जानते उनके लिए मंच पर सुर्ख (लाल) जोड़े में फैज की बेटी मुनीजा हाशमी और स्याह (काले) कपड़ों में विश्वरंजन..बाकी हस्तियां भी नामचीन शख्सियतें हैं। एक बात और, फैजयाब के मायने लाभान्वित करने से है)