भिलाई निगम में ‘जमीन नीलामी’ पर सियासी बवाल: महापौर नीरज पाल का बड़ा आरोप


“शासन की अनुमति बिना आयुक्त ने निकाली नीलामी, एमआईसी और सामान्य सभा के अधिकारों पर अतिक्रमण”

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में निगम की जमीनों की नीलामी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। महापौर नीरज पाल ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि निगम आयुक्त ने राज्य शासन की अनुमति के बिना ही संजय नगर मैदान सहित अन्य जमीनों की नीलामी के लिए सार्वजनिक निविदा जारी कर दी, जो न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि एमआईसी और सामान्य सभा के अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।

महापौर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार पत्रों के माध्यम से संजय नगर मैदान और अन्य निगम जमीनों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्र 2021-22 में निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और शहर के विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से महापौर परिषद ने निगम की व्यावसायिक जमीनों को 30 साल की लीज पर देने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन अब तक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।

बिना अनुमति निकली निविदा – महापौर ने उठाए सवाल
महापौर का आरोप है कि शासन से स्वीकृति नहीं मिलने के बावजूद आयुक्त ने अपने स्तर पर जमीनों की नीलामी के लिए निविदा आमंत्रित कर दी। उन्होंने इसे निगम की लोकतांत्रिक व्यवस्था और परिषद के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया।
महापौर ने यह भी कहा कि बाद में स्थानीय विधायक के दबाव में नीलामी निरस्त करने की घोषणा करना शासन और निगम व्यवस्था दोनों का अपमान है।

संजय नगर मैदान को बचाने की पहल-
महापौर ने कहा कि संजय नगर मैदान की सामाजिक, खेल और सांस्कृतिक उपयोगिता को देखते हुए अब परिषद भी इसे संरक्षित करने के पक्ष में है। इसके लिए शासन को पत्र लिखकर भूमि का भू-उपयोग व्यवसायिक से बदलकर खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी।

राधिका नगर और वार्ड-4 के कामों पर भी सवाल
महापौर ने निगम आयुक्त पर अन्य मामलों में भी नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि

राधिका नगर में 4.50 करोड़ रुपये के कार्यों की स्वीकृति-
वार्ड क्रमांक-4 में 21.54 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी

बिना एमआईसी और सामान्य सभा में लाए ही दे दी गई, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
दशहरा मैदान को लेकर भी फैलाई जा रही अफवाहें
महापौर ने स्पष्ट किया कि शांति नगर दशहरा मैदान को बेचने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि मैदान के संरक्षण और बेहतर रखरखाव के लिए संस्थानों से रुचि की अभिव्यक्ति मांगी गई थी, लेकिन इसे जमीन बेचने के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

विधायक को भी घेरा-
महापौर ने स्थानीय विधायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वयं कई बार पार्षद रह चुके हैं और अच्छी तरह जानते हैं कि नगर निगम को जमीन बेचने का अधिकार ही नहीं है, इसके बावजूद परिषद पर आरोप लगाना राजनीतिक बयानबाजी है।

कलेक्टर और शासन से शिकायत की चेतावनी
महापौर नीरज पाल ने कहा कि आयुक्त के कथित विधि-विरुद्ध कार्यों की शिकायत कलेक्टर और राज्य शासन से की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने की भी चेतावनी दी गई है।