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दुर्ग: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव पर सरकारी कार की मरम्मत में गंभीर वित्तीय अनियमितता और निजी विवाद को छिपाने के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार कुलसचिव ने कुलपति के आदेश के बावजूद दुर्घटना की एफआईआर नहीं कराई और बिना बीमा क्लेम कराए ही खुद मरम्मत कराकर 24 हजार रुपए विश्वविद्यालय के खाते से निकाल लिए। कुलपति ने अब वित्त विभाग से बिना प्रशासकीय स्वीकृति राशि आहरण की जानकारी मांगी है।
क्या है मामला
सूत्रों के मुताबिक घटना 17फरवरी 2026 की है। कुलसचिव रायपुर स्थित होटल मैरियट में शिक्षा संवाद में शामिल होने गए थे। लौटते समय शाम करीब 7 बजे वे भिलाई में अपनी महिला मित्र के घर रुके। महिला भिलाई के एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।
आरोप है कि इसी दौरान महिला के पति अचानक वहां पहुंच गए और कुलसचिव को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। पति ने अपने दोस्तों को बुला लिया और कुलसचिव के साथ मारपीट की। किसी तरह कुलसचिव कपड़े लेकर भागे। पति और दोस्तों ने कार से पीछा किया। कुलसचिव और ड्राइवर वाई ब्रिज के नीचे कार लावारिस छोड़कर विश्वविद्यालय कार्यालय में छिप गए।

गुस्सा कार पर उतारा
कुलसचिव को न पाकर महिला के पति और दोस्तों ने लाठी-डंडे और रॉड से सरकारी कार में तोड़फोड़ की। कार के सारे कांच टूट गए। सूत्रों का कहना है कि कार की स्थिति देखकर दूसरी गाड़ी से ठोकर लगने की बात संदिग्ध लग रही थी।
एफआईआर के बजाय खुद कराई मरम्मत
जब फाइल कुलपति के पास पहुंची तो उन्होंने दुर्घटना की एफआईआर कराने और बीमा क्लेम करने की टीप लिखी। आरोप है कि कुलसचिव ने एफआईआर नहीं कराई, क्योंकि मामला निजी विवाद से जुड़ा था। बिना एफआईआर बीमा क्लेम नहीं हो सका।
सूत्रों के अनुसार कुलसचिव ने वाहन प्रकोष्ठ से मरम्मत कराने के बजाय खुद ही कार बनवा ली और कुलपति की अनुमति बिना 24,000 रुपए का बिल वित्त विभाग से पास कराकर भुगतान ले लिया।
कार की पात्रता पर भी सवाल
विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार कुलसचिव को निजी इस्तेमाल के लिए सरकारी कार की पात्रता नहीं है। उन्हें केवल घर से कार्यालय लाने-ले जाने के लिए पूल कार की सुविधा है। आरोप है कि कुलसचिव ने नियम विरुद्ध एक सरकारी कार अपने लिए आबंटित करवा रखी है।
कुलपति ने पूरे मामले में वित्त विभाग से बिना प्रशासकीय स्वीकृति राशि आहरण की जानकारी मांगी है। कुलसचिव पर निजी विवाद का खर्च विश्वविद्यालय के खाते में डालने का आरोप है। फिलहाल मामला जांच और स्पष्टीकरण के दायरे में है।
विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलसचिव का आधिकारिक पक्ष लेने का प्रयास किया गया नहीं मिल सका है।