6 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या: आरोपी सोमेश यादव को फांसी की सजा


दुर्ग। मोहन नगर थाना क्षेत्र में 6 वर्ष 3 माह की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दिल दहला देने वाले मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सोमेश यादव (24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड-58) को “विरलतम से विरलतम” अपराध मानते हुए दोहरी फांसी की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश चतुर्थ एफटीएससी पॉक्सो कोर्ट दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड), 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) में मृत्युदंड और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड, जबकि बीएनएस की धारा 238(क) में 5 साल सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माने से दंडित किया है। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये प्रतिकर देने का भी आदेश दिया है। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए प्रकरण हाईकोर्ट बिलासपुर भेजा जाएगा।

क्या था पूरा मामला
6 अप्रैल 2025 को थाना मोहन नगर में 6 साल की बच्ची के लापता होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल पतासाजी शुरू की। तकनीकी और मैदानी सूचनाओं के आधार पर तलाश के दौरान बच्ची एक वाहन से बरामद हुई। पुलिस तत्काल उसे अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया।

वैज्ञानिक विवेचना बनी सजा का आधार
एसपी दुर्ग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की थी। विवेचक निरीक्षक शिव चंद्रा ने केस की जांच की।

पुलिस ने इस केस को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत बनाया:

  • घटनास्थल का नजरी नक्शा और सूक्ष्म साक्ष्य संकलन
  • आरोपी के कपड़े, मृतिका के जैविक नमूने, स्वाब, बाल, नाखून जप्त
  • आरोपी और मृतिका के DNA सैंपल का मिलान
  • CCTV फुटेज और DVR जब्त कर FSL भेजा गया
  • मेमोरेंडम के आधार पर वस्तुओं की बरामदगी

भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया। सभी रिपोर्टों को आपस में जोड़कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई।

शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने प्रभावी पैरवी की, जिसके चलते आरोपी को सजा हुई।

पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों की गुमशुदगी या संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। पुलिस ने बालिका की पहचान गोपनीय रखी है।