हमारे बारे में
छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
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(अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट)रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य के सुप्रसिद्ध रेसलर प्रतीक तिवारी को खेल (रेसलिंग) के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिये प्रतिष्ठित पद्मश्री ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। फाउण्डेशन के संस्थापक / अध्यक्ष आकाश साहू और प्रबंध निदेशक आशुतोष सिंह ने रिकॉर्ड सर्टिफिकेट सौंपते हुये कहा है कि खेल (रेसलिंग) के क्षेत्र में आपके समर्पित योगदान आपकी प्रतिबद्धता अनुशासन , दृढ़ संकल्प , शारीरिक फिटनेस , लगन और एक मजबूत प्रतिस्पर्धी भावना को दर्शाती है। रेसलिंग से अपने जुड़ाव के माध्यम से आपने एथलेटिक विकास और खेल उत्कृष्टता की दिशा में अद्वितीय समर्पण का प्रदर्शन किया है। आपके प्रयास अनुशासन , साहस , टीम भावना , आत्मविश्वास और खेल भावना के मूल्यों को प्रदर्शित करते हैं , जो फिटनेस और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की सकारात्मक भावना को प्रेरित करते हैं। समाज में आपके बहुमूल्य योगदान की सराहना के साथ हम आपको यह सर्टिफिकेट प्रदान करते हैं।
इस प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किये जाने पर प्रदेश भर के जनप्रतिनिधियों , खेल प्रेमियों , मीडियाकर्मियों और नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुये उन्हें बधाई दी है। बताते चलें इस अवार्ड में देश-विदेश के चुनिंदा प्रतिभाओं को उनके असाधारण कार्यों के लिये सम्मानित किया जाता है। रेसलर प्रतीक तिवारी ने अपनी कड़ी मेहनत , अनुशासन और जुनून से रेसलिंग के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप बैल्ट (पदक) जीते हैं। उनकी इस उपलब्धि से ना केवल जिला और प्रदेश बल्कि पूरे भारत वर्ष का नाम गौरवान्वित हुआ है। पद्मश्री ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड मिलने पर रेसलर तिवारी ने कहा कि यह सम्मान मेरे अकेले का नहीं , बल्कि मेरे गुरुजनों , परिवार और पूरे देशवासियों का है। यह सम्मान मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा देगा।
गौरतलब है कि रेसलिंग की दुनियँ में द लायन के नाम से सुप्रसिद्ध रेसलर प्रतीक तिवारी (26 वर्षीय) जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम अमोरा ( महंत) निवासी श्रीमति मंजू रामगुलाम तिवारी के इकलौते सुपुत्र हैं। बारहवीं तक की शिक्षा अपने गांव में ही पूरी करने के बाद इन्होने ग्रेजुएशन किया है। अपने निवास पर पत्रकार वार्ता में अरविन्द तिवारी से चर्चा करते हुये प्रतीक ने बताया कि उनके पिता रामगुलाम तिवारी खली के बड़े फैन हैं। मैंने जब से होश सम्हाला एंटरटेनमेंट के नाम पर उन्हें टीवी पर फाइट देखते ही पाया। मन ही मन मैंने तय कर लिया था कि रेसलर ही बनना है। तेरह साल की उम्र में घर पर ही जिम बनाकर एक्सरसाइज करने लगा। मेरी लगन देखकर पैरेंट्स भी खली के पास ट्रेनिंग के लिये भेजने राजी हो गये। जिसके बाद उन्होंने अपने इकलौते बेटे को रेसलिंग में भेजने का ठान लिया और द ग्रेट खली के पास प्रशिक्षण के लिये पंजाब भेजा। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद ट्रेनिंग लेकर प्रतीक अब तक दो सौ से अधिक रेसलिंग में हिस्सा लेकर कई राज्यों सहित विदेशी रेसलरों को भी रिंग में धूल चटा कर अपने जिला , प्रदेश और देश का नाम रोशन कर चुका है।
रेसलिंग में सबसे रोमांचक होने वाले मौतके मुकाबले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मौत का मुकाबला एक मैच ना होकर दो रेसलरों के बीच जिंदगी की जंग भी होता है , जिसमें अपनी जीत दर्ज करने के लिये सभी रेसलर हर चुनौती को स्वीकार करने को तैयार होते हैं। इस मैच की खासियत ये रहती कि यह मैच नो रूल्स के अंतर्गत खेला गया यानि प्रो- रेसलिंग से जुड़े कोई भी नियम इस मैच में लागू नहीं होते। इस फाइट में दर्शकों को टेबल , चेयर , ट्यूबलाईट , हॉकी , डण्डे जैसे प्राप्स का इस्तेमाल देखने को मिलता है। इस मैच में भी ये कई विदेशी रेसलरों को हराकर चैंपियनशिप बेल्ट हासिल कर चुके हैं। अंत में अपने लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर रेसलर प्रतीक ने बताया कि उनका पहला और अंतिम लक्ष्य रेसलिंग ही है। वे अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने लाना चाहते हैं ताकि दूसरे को प्रेरणा मिल सके।